Skip to main content

Posts

Showing posts from July, 2019

Motivation... must read...

-✍️ 👇👇👇👇👇👇👇👇👇 👉 1. न मैदान छोड़ो, न इंतज़ार करो, बस चलते रहो  👉 2. अगर आप महानता हासिल करना चाहते हो तो इज़ाजत लेना बंद करो। 👉 3. गलतियां इस बात का साबुत है कि आप प्रयास कर रहे हैं। 👉 4. सफल लोग दूसरों से अलग नहीं होते, सफल लोगों की सोच दूसरों से अलग होती है। 👉 5. सफलता का यह मतलब नहीं होता है – जो आपके पास नहीं है उसे पाना, इसका सही मतलब होता है, आगे बढ़ते जाना भले ही आपके पास जो भी वो लुट जाये। 👉 6. अपने गलतियों के लिए स्वयं को कोसना / आलोचना करना बंद करों, और अपने सफलताओं / उपलब्धताओं के लिए स्वयं की प्रशंसा करें। 👉 7. ज़िन्दगी बिना किसी उद्देश्य के अर्थहीन है. क्या आपको खुद की नज़र से उठाना है?? 👉 8.जो इंसान खुद की नज़र से उठ गया, वो दुनिया की नज़र से अपने आप उठ जायेगा। 👉 9.. अपनी दिन की आवाज़ को सुनो। वो क्या चाहता है उसे करो। 👉 10. आज में जो कुछ भी हूँ, अपनी असफलता की वज़ह से हूँ 👉 11. अपने दिमाग को कंट्रोल करो, नहीं तो यह तुम्हें कंट्रोल करेगा। 👉 12. यदि आपके पास ज़रुरत से ज्यादा है, तो उनके साथ शेयर करें जिनको उसकी ज्य...
बंदरों का सरदार अपने बच्चे के साथ किसी बड़े से पेड़ की डाली पर बैठा हुआ था . बच्चा बोला , ” मुझे भूख लगी है , क्या आप मुझे खाने के लिए कुछ पत्तियां दे सकते हैं ?” बन्दर मुस्कुराया , ” मैं दे तो सकता हूँ , पर अच्छा होगा तुम खुद ही अपने लिए पत्तियां तोड़ लो. “ ” लेकिन मुझे अच्छी पत्तियों की पहचान नहीं है .”, बच्चा उदास होते हुए बोला . “तुम्हारे पास एक विकल्प है , ” बन्दर बोला , ” इस पेड़ को देखो , तुम चाहो तो नीचे की डालियों से पुरानी – कड़ी पत्तियां चुन सकते हो या ऊपर की पतली डालियों पर उगी ताज़ी -नरम पत्तियां तोड़ कर खा सकते हो .” बच्चा बोला , ” ये ठीक नहीं है , भला ये अच्छी – अच्छी पत्तियां नीचे क्यों नहीं उग सकतीं , ताकि सभी लोग आसानी से उन्हें खा सकें .?” “यही तो बात है , अगर वे सबके पहुँच में होतीं तो उनकी उपलब्धता कहाँ हो पाती … उनके बढ़ने से पहले ही उन्हें तोड़ कर खा लिया जाता !”, ” बन्दर ने समझाया . ” लेकिन इन पतली डालियों पर चढ़ना खतरनाक हो सकता है , डाल टूट सकती है , मेरा पाँव फिसल सकता है , मैं नीचे गिर कर चोटिल हो सकता हूँ …”, बच्चे ने अपनी चिंता जताई . बन्दर बोला , “सुनो बे...

खुद से बात.....

 एक बार एक किसान की घड़ी कहीं खो गयी. वैसे तो घडी कीमती नहीं थी पर किसान उससे भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ था और किसी भी तरह उसे वापस पाना चाहता था. उसने खुद भी घडी खोजने का बहुत प्रयास किया, कभी कमरे में खोजता तो कभी बाड़े तो कभी अनाज के ढेर में ….पर तामाम कोशिशों के बाद भी घड़ी नहीं मिली. उसने निश्चय किया की वो इस काम में बच्चों की मदद लेगा और उसने आवाज लगाई , ” सुनो बच्चों , तुममे से जो कोई भी मेरी खोई घडी खोज देगा उसे मैं १०० रुपये इनाम में दूंगा.” फिर क्या था , सभी बच्चे जोर-शोर दे इस काम में लगा गए…वे हर जगह की ख़ाक छानने लगे , ऊपर-नीचे , बाहर, आँगन में ..हर जगह…पर घंटो बीत जाने पर भी घडी नहीं मिली. अब लगभग सभी बच्चे हार मान चुके थे और किसान को भी यही लगा की घड़ी नहीं मिलेगी, तभी एक लड़का उसके पास आया और बोला , ” काका मुझे एक मौका और दीजिये, पर इस बार मैं ये काम अकेले ही करना चाहूँगा.” किसान का क्या जा रहा था, उसे तो घडी चाहिए थी, उसने तुरंत हाँ कर दी. लड़का एक-एक कर के घर के कमरों में जाने लगा…और जब वह किसान के शयन कक्ष से निकला तो घड़ी उसके हाथ में थी. किसान घड़ी देख...

life ki problems ka solution..

पिताजी कोई किताब पढने में व्यस्त थे , पर उनका बेटा बार-बार आता और उल्टे-सीधे सवाल पूछ कर उन्हें डिस्टर्ब कर देता . पिता के समझाने और डांटने का भी उस पर कोई असर नहीं पड़ता. तब उन्होंने सोचा कि अगर बच्चे को किसी और काम में उलझा दिया जाए तो बात बन सकती है. उन्होंने पास ही पड़ी एक पुरानी किताब उठाई और उसके पन्ने पलटने लगे. तभी उन्हें विश्व मानचित्र छपा दिखा , उन्होंने तेजी से वो पेज फाड़ा और बच्चे को बुलाया – ” देखो ये वर्ल्ड मैप है , अब मैं इसे कई पार्ट्स में कट कर देता हूँ , तुम्हे इन टुकड़ों को फिर से जोड़ कर वर्ल्ड मैप तैयार करना होगा.” और ऐसा कहते हुए उन्होंने ये काम बेटे को दे दिया. बेटा तुरंत मैप बनाने में लग गया और पिता यह सोच कर खुश होने लगे की अब वो आराम से दो-तीन घंटे किताब पढ़ सकेंगे . लेकिन ये क्या, अभी पांच मिनट ही बीते थे कि बेटा दौड़ता हुआ आया और बोला , ” ये देखिये पिताजी मैंने मैप तैयार कर लिया है .” पिता ने आश्चर्य से देखा , मैप बिलकुल सही था, – ” तुमने इतनी जल्दी मैप कैसे जोड़ दिया , ये तो बहुत मुश्किल काम था ?” ” कहाँ पापा, ये तो बिलकुल आसान था , आपने जो पेज दि...
 बात उस समय की है जब महात्मा बुद्ध विश्व भर में भ्रमण करते हुए बौद्ध धर्म का प्रचार कर रहे थे और लोगों को ज्ञान दे रहे थे| एक बार महात्मा बुद्ध अपने कुछ शिष्यों के साथ एक गाँव में भ्रमण कर रहे थे| उन दिनों कोई वाहन नहीं हुआ करते थे सो लोग पैदल ही मीलों की यात्रा करते थे| ऐसे ही गाँव में घूमते हुए काफ़ी देर हो गयी थी| बुद्ध जी को काफ़ी प्यास लगी थी| उन्होनें अपने एक शिष्य को गाँव से पानी लाने की आज्ञा दी| जब वह शिष्य गाँव में अंदर गया तो उसने देखा वहाँ एक नदी थी जहाँ बहुत सारे लोग कपड़े धो रहे थे कुछ लोग नहा रहे थे तो नदी का पानी काफ़ी गंदा सा दिख रहा था| शिष्य को लगा की गुरु जी के लिए ऐसा गंदा पानी ले जाना ठीक नहीं होगा, ये सोचकर वह वापस आ गया| महात्मा बुद्ध को बहुत प्यास लगी थी इसीलिए उन्होनें फिर से दूसरे शिष्य को पानी लाने भेजा| कुछ देर बाद वह शिष्य लौटा और पानी ले आया| महात्मा बुद्ध ने शिष्य से पूछा की नदी का पानी तो गंदा था फिर तुम साफ पानी कैसे ले आए| शिष्य बोला की प्रभु वहाँ नदी का पानी वास्तव में गंदा था लेकिन लोगों के जाने के बाद मैने कुछ देर इंतजार किया| और कुछ देर बाद...

आपकी हिम्मत ही आपको अपनी मनचाही ज़िन्दगी दे सकती है ,

बंदरों का सरदार अपने बच्चे के साथ किसी बड़े से पेड़ की डाली पर बैठा हुआ था . बच्चा बोला , ” मुझे भूख लगी है , क्या आप मुझे खाने के लिए कुछ पत्तियां दे सकते हैं ?” बन्दर मुस्कुराया , ” मैं दे तो सकता हूँ , पर अच्छा होगा तुम खुद ही अपने लिए पत्तियां तोड़ लो. “ ” लेकिन मुझे अच्छी पत्तियों की पहचान नहीं है .”, बच्चा उदास होते हुए बोला . “तुम्हारे पास एक विकल्प है , ” बन्दर बोला , ” इस पेड़ को देखो , तुम चाहो तो नीचे की डालियों से पुरानी – कड़ी पत्तियां चुन सकते हो या ऊपर की पतली डालियों पर उगी ताज़ी -नरम पत्तियां तोड़ कर खा सकते हो .” बच्चा बोला , ” ये ठीक नहीं है , भला ये अच्छी – अच्छी पत्तियां नीचे क्यों नहीं उग सकतीं , ताकि सभी लोग आसानी से उन्हें खा सकें .?” “यही तो बात है , अगर वे सबके पहुँच में होतीं तो उनकी उपलब्धता कहाँ हो पाती … उनके बढ़ने से पहले ही उन्हें तोड़ कर खा लिया जाता !”, ” बन्दर ने समझाया . ” लेकिन इन पतली डालियों पर चढ़ना खतरनाक हो सकता है , डाल टूट सकती है , मेरा पाँव फिसल सकता है , मैं नीचे गिर कर चोटिल हो सकता हूँ …”, बच्चे ने अपनी चिंता जताई . बन्दर बोला , “सुनो बे...

छुपे हुए सेब...

 एक 7 साल की लड़की को मैथ्स पढ़ा रहे टीचर ने पूछा ,” अगर मैं तुम्हे एक सेब दूं , फिर एक और सेब दूं , और फिर एक और सेब दूं , तो तुम्हारे पास कितने सेब हो जायेंगे ?” लड़की ने कुछ देर सोचा और , और अपनी ऊँगली पर जोड़ने लगी … ” चार ” , लड़की का उत्तर आया . टीचर थोड़ा निराश हो गया, उसे लगा कि ये तो कोई भी बता सकता था. “शायद बच्चे ने ठीक से सुना नहीं .” – टीचर ने मन ही मन सोचा . उसने पुनः प्रश्न दोहराया ; ” ध्यान से सुनो – अगर मैं तुम्हे एक सेब दूं , फिर एक और सेब दूं , और फिर एक और सेब दूं , तो तुम्हारे पास कितने सेब हो जायेंगे ?” लड़की टीचर का चेहरा देख कर समझ चुकी थी कि वो खुश नहीं है, वह पुनः अपनी उँगलियों पर जोड़ने लगी, और सोचने लगी कि ऐसा क्या उत्तर बताऊँ जिससे टीचेर खुश हो जाए . अब उसके दिमाग में ये नहीं था कि उत्तर सही हो , बल्कि ये था कि टीचर खुश हो जाये. पर बहुत सोचने के बाद भी उसने संकोच करते हुए कहा , ” चार “ टीचर फिर निराश हो गया , उसे याद आया कि लड़की को स्ट्रॉबेरी बहुत पसंद हैं , हो सकता है सेब पसनद न होने के कारण वो अपना फोकस लूज़ कर दे रही हो. इस बार...

मानसिकता...

 एक बार एक व्यापारी अपने चार ऊटों के साथ व्यापार  करने जा रहा था। चलते-चलते जब रात हुई तब वह एक सराय पर रुका। सराय में जाने से पहले वह अपने ऊंट एक पेड़ से बाँधने लगा। तीन ऊंट बाँधने के बाद उसने देखा कि चौथा ऊंट बंधने के लिए उसने जो  रस्सी रखी थी वह कहीं रास्ते में गिर गयी। अँधेरा बढ़ रहा था। व्यापारी के पास कोई और रस्सी भी नहीं थी। उसने आस-पास देखा कि शायद उसे कोई दूसरी रस्सी मिल जाए लेकिन बहुत ढूँढने के बाद भी उसे कोई रस्सी नहीं मिली। ऊंट को बंधना भी जरूरी था। नहीं तो ऊंट रात में कहीं भी जा सकता था। थक-हार कर और परेशान होकर व्यापारी वहीं बैठ गया। तभी वहां सराय का मालिक आया। “क्या हुआ श्रीमान? आप यहाँ क्यों बैठ गए। हम कबसे आपका इंतजार कर रहे हैं।” सराय के मालिक ने व्यापारी से पूछा। व्यापारी ने सराय के मालिक को अपनी समस्या बताई। व्यापारी की बात सुनते ही सराय का मालिक जोर से हंसा और कहा, “हा..हा…हा… बस इतनी सी बात। ये समस्या तो कुछ भी नहीं है। आप ऐसा करिए इसे ऐसे ही बाँध दीजिये।” “ऐसे ही बाँध दीजिये मतलब?” व्यापारी ने हैरान होते हुए पूछा। “ऐसे ही मतलब ये कि आप इसे...

पत्थर की मूर्ति

 एक बार की बात है, एक मूर्तिकार एक जंगल से गुजर रहा था रास्ते में उसकी नजर एक बहुत ही सुंदर पत्थर पर पड़ी, वह उस पत्थर के सामने रुक गया और सोचने लगा इससे बहुत ही सुंदर मूर्ति बनेगी.यह सोचते हुए उसने अपने थैले से सामान निकाला वह अपने हथौड़े और छीनी से उस पत्थर पर वार ही करने वाला था, अचानक पत्थर से आवाज आयी, रुको मुझे छोड़ दो तुम्हे आगे रास्ते में दुसरा पत्थर मिल जायेगा.मूर्तिकार बहुत ही दयालु था उसने बिना कोई सवाल किये अपना सामान उठाया और आगे बढ़ गया, वह जंगल में कुछ दूर ही गया था उसे एक ओर पत्थर दिखाई दिया, वह पत्थर भी काफी विशाल और सुंदर था मूर्तिकार वही रुक गया.उसने अपने हथौड़े और छीनी से उस पर काम करना शुरु कर दिया कुछ ही समय बाद उसने उस पत्थर की बहुत ही सुंदर मूर्ति बना दी मूर्ति बनाने के बाद वह जंगल पार कर के एक गाँव पहुँच गया.गाँव वालो ने उससे कहा हमारे गाँव में एक नया मंदिर बना है, उसके लिए भगवान की एक मूर्ति बना दो मूर्तिकार ने कहा मैंने अभी-अभी जंगल में एक मूर्ति बनाई है, तुम लोग उसे ले आओ, लोग जंगल में जाकर उस मूर्ति को ले आये और मंदिर में स्थापित कर दिया.मूर्ति स्थापित...

"सामाजिक बनिये.."

एक *चूहा* एक कसाई के घर में बिल बना कर रहता था। एक दिन *चूहे* ने देखा कि उस कसाई और उसकी पत्नी एक थैले से कुछ निकाल रहे हैं। चूहे ने सोचा कि शायद कुछ खाने का सामान है। उत्सुकतावश देखने पर उसने पाया कि वो एक *चूहेदानी* थी। ख़तरा भाँपने पर उस ने पिछवाड़े में जा कर *कबूतर* को यह बात बताई कि घर में चूहेदानी आ गयी है। कबूतर ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि मुझे क्या? मुझे कौनसा उस में फँसना है? निराश चूहा ये बात *मुर्गे* को बताने गया। मुर्गे ने खिल्ली उड़ाते हुए कहा… जा भाई.. ये मेरी समस्या नहीं है। हताश चूहे ने बाड़े में जा कर *बकरे* को ये बात बताई… और बकरा हँसते हँसते लोटपोट होने लगा। उसी रात चूहेदानी में खटाक की आवाज़ हुई, जिस में एक ज़हरीला *साँप* फँस गया था। अँधेरे में उसकी पूँछ को चूहा समझ कर उस कसाई की पत्नी ने उसे निकाला और साँप ने उसे डस लिया। तबीयत बिगड़ने पर उस व्यक्ति ने हकीम को बुलवाया। हकीम ने उसे *कबूतर* का सूप पिलाने की सलाह दी। कबूतर अब पतीले में उबल रहा था। खबर सुनकर उस कसाई के कई रिश्तेदार मिलने आ पहुँचे जिनके भोजन प्रबंध हेतु अगले दिन उसी *मुर्गे* को क...
गिद्धों का एक झुण्ड खाने की तलाश में भटक रहा था। उड़ते – उड़ते वे एक टापू पे पहुँच गए। वो जगह उनके लिए स्वर्ग के समान थी। हर तरफ खाने के लिए मेंढक, मछलियाँ और समुद्री जीव मौजूद थे और इससे भी बड़ी बात ये थी कि वहां इन गिद्धों का शिकार करने वाला कोई जंगली जानवर नहीं था और वे बिना किसी भय के वहां रह सकते थे। युवा गिद्ध  कुछ ज्यादा ही उत्साहित थे, उनमे से एक बोला, ” वाह ! मजा आ गया, अब तो मैं यहाँ से कहीं नहीं जाने वाला, यहाँ तो बिना किसी मेहनत के ही हमें बैठे -बैठे खाने को मिल रहा है!” बाकी गिद्ध भी उसकी हाँ में हाँ मिला ख़ुशी से झूमने लगे। सबके दिन मौज -मस्ती में बीत रहे थे लेकिन झुण्ड का सबसे बूढ़ा गिद्ध इससे खुश नहीं था। एक दिन अपनी चिंता जाहिर करते हुए वो बोला, ” भाइयों, हम गिद्ध हैं, हमें हमारी ऊँची उड़ान और अचूक वार करने की ताकत के लिए जाना जाता है। पर जबसे हम यहाँ आये हैं हर कोई आराम तलब हो गया है …ऊँची उड़ान तो दूर ज्यादातर गिद्ध तो कई महीनो से उड़े तक नहीं हैं…और आसानी से मिलने वाले भोजन की वजह से अब हम सब शिकार करना भी भूल रहे हैं … ये हमारे भविष्य के लिए अच्छा नहीं है …मैंने...

हम सभी ऊँचा उड़ने के लिए ही बने हैं।

 बहुत समय पहले की बात है , एक राजा को उपहार में किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किये । वे बड़ी ही अच्छी नस्ल के थे , और राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे।. राजा ने उनकी देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया। जब कुछ महीने बीत गए तो राजा ने बाजों को देखने का मन बनाया , और उस जगह पहुँच गए जहाँ उन्हें पाला जा रहा था। राजा ने देखा कि दोनों बाज काफी बड़े हो चुके थे और अब पहले से भी शानदार लग रहे थे । राजा ने बाजों की देखभाल कर रहे आदमी से कहा, ” मैं इनकी उड़ान देखना चाहता हूँ , तुम इन्हे उड़ने का इशारा करो । “ आदमी ने ऐसा ही किया। इशारा मिलते ही दोनों बाज उड़ान भरने लगे , पर जहाँ एक बाज आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा था , वहीँ दूसरा , कुछ ऊपर जाकर वापस उसी डाल पर आकर बैठ गया जिससे वो उड़ा था। ये देख , राजा को कुछ अजीब लगा. “क्या बात है जहाँ एक बाज इतनी अच्छी उड़ान भर रहा है वहीँ ये दूसरा बाज उड़ना ही नहीं चाह रहा ?”, राजा ने सवाल किया। ” जी हुजूर , इस बाज के साथ शुरू से यही समस्या है , वो इस डाल को छोड़ता ही नहीं।” राजा को दोनों ही बाज प्रिय थे , और वो दुसरे बाज क...

"आप अपना बेहतर दीजिये, फिर देखिये सारी दुनिया आपकी प्रशंसा करेगी..

एक छोटा बच्चा एक बड़ी दुकान पर लगे टेलीफोन बूथ पर जाता हैं और मालिक से छुट्टे पैसे लेकर एक नंबर डायल करता हैं। दुकान का मालिक उस लड़के को ध्यान से देखते हुए उसकी बातचीत पर ध्यान देता हैं - लड़का - मैडम क्या आप मुझे अपने बगीचे की साफ़ सफाई का काम देंगी? औरत - (दूसरी तरफ से) नहीं, मैंने एक दुसरे लड़के को अपने बगीचे का काम देखने के लिए रख लिया हैं। लड़का - मैडम मैं आपके बगीचे का काम उस लड़के से आधे वेतन में करने को तैयार हूँ! औरत - मगर जो लड़का मेरे बगीचे का काम कर रहा हैं उससे मैं पूरी तरह संतुष्ट हूँ। लड़का - ( और ज्यादा विनती करते हुए) मैडम मैं आपके घर की सफाई भी फ्री में कर दिया करूँगा!! औरत - माफ़ करना मुझे फिर भी जरुरत नहीं हैं। धन्यवाद। लड़के के चेहरे पर एक मुस्कान उभरी और उसने फोन का रिसीवर रख दिया। दुकान का मालिक जो छोटे लड़के की बात बहुत ध्यान से सुन रहा था वह लड़के के पास आया और बोला- " बेटा मैं तुम्हारी लगन और व्यवहार से बहुत खुश हूँ, मैं तुम्हे अपने स्टोर में नौकरी दे सकता हूँ"। लड़का - नहीं सर मुझे जॉब की जरुरत नहीं हैं आपका धन्यवाद। दुक...

SAVE HUMAN BEHAVIOR FIRST...

 पिता बेटे को डॉक्टर बनाना चाहता था। बेटा इतना मेधावी नहीं था कि NEET क्लियर कर लेता। इसलिए  दलालों से MBBS की  सीट खरीदने का जुगाड़ किया । ज़मीन, जायदाद, ज़ेवर सब गिरवी रख के 35 लाख रूपये दलालों को दिए, लेकिन अफसोस वहाँ धोखा हो गया। अब क्या करें...? लड़के को तो डॉक्टर बनाना है कैसे भी...!! फिर किसी तरह विदेश में लड़के का एडमीशन कराया गया, वहाँ लड़का चल नहीं पाया। फेल होने लगा.. डिप्रेशन में रहने लगा। रक्षाबंधन पर घर आया और घर में ही फांसी लगा ली। सारे अरमान धराशायी.... रेत के महल की तरह ढह गए.... 20 दिन बाद माँ-बाप और बहन ने भी कीटनाशक खा कर आत्म-हत्या कर ली। अपने बेटे को डॉक्टर बनाने की झूठी महत्वाकांक्षा ने पूरा परिवार लील लिया। माँ बाप अपने सपने, अपनी महत्वाकांक्षा अपने बच्चों से पूरी करना चाहते हैं ... मैंने देखा कि कुछ माँ बाप अपने बच्चों को Topper बनाने के लिए इतना ज़्यादा अनर्गल दबाव डालते हैं कि बच्चे का स्वाभाविक विकास ही रुक जाता है। आधुनिक स्कूली शिक्षा बच्चे की Evaluation और Grading ऐसे करती है, जैसे सेब के बाग़ में सेब की खेती की ...

MISSION CHANDRAYAAN-2

 *Chandrayaan-2: भारत ने रचा इतिहास, इसरो ने सफलतापूर्वक लाँन्च किया चंद्रयान-2* *चन्द्रयान-2* (Chandrayaan-2) मिशन 22 जुलाई 2019 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरीकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया. भारत इससे पहले 15 जुलाई को चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग करने वाला था, लेकिन क्रॉयोजेनिक इंजन में लीकेज के कारण इसे 22 जुलाई तक के लिए रोक दिया गया था. *◆ मिशन का उद्देश्य* मिशन का सबसे पहला उद्देश्य चांद की सतह पर सुरक्षित उतरना और फिर सतह पर रोबोट रोवर संचालित करना है. इसका मुख्य उद्देश्य चांद की सतह का नक्शा तैयार करना, खनिजों की मौजूदगी का पता लगाना, चंद्रमा के बाहरी वातावरण को स्कैन करना और किसी न किसी रूप में पानी की उपस्थिति का पता लगाना है. इस मिशन  एक और उद्देश्य चांद को लेकर हमारी समझ को और बेहतर करना और मानवता को लाभान्वित करने वाली खोज करना है. *◆ विभिन्न प्रयोगों का संचालन करने वाला चौथा राष्ट्र* इस तरह भारत पूर्व सोवियत संघ, संयुक्त राज्य अमरीका और चीन के बाद यहां उतरने वाला और सतह पर रहकर चांद की कक्षा, सतह और वातावरण में विभिन्न प्रयोगों का संचालन कर...

सही राजा का चुनाव

प्राचीन समय (Ancient time) की बात है जहाँ एक नगर में एक राजा रहा करते थे, उनकी 10 रानियां (Queens) थी और उन सब रानियों के पच्चीस पुत्र थे ! समय के साथ साथ राजा भी बूढा हो चला था ! उस राजा ने सोचा कि अब बुढ़ापा मेरा साथ नहीं दे रहा है तो उसने अपने सभी पुत्रो में से किसी एक सुयोग्य पुत्र (Competent Son) को राजा बनाने का निश्चय (Decision) किया ! लेकिन राजा चाहता था कि राजा के पद के लिए सही पुत्र का चुनाव होना चाहिए ताकि आने वाले समय में प्रजा उन्नति (Development) कर सके ! राजा के मन में एक विचार (Discretion) आया और उसने अपने सभी पुत्रो के लिए एक विशाल भोज (Large Banquet) कराने की सोची ! अगले ही दिन राजा ने अपने सभी पुत्रो के लिए एक विशाल भोज का आयोजन (Arrangement) किया जिसमे अनेक प्रकार के स्वादिष्ट पकवान (Tasty Delicacy) आदि भी शामिल थे ! जब सभी पुत्रो ने भोजन शुरू किया तो राजा के कहे अनुसार सेवको (Servant/Devotee) ने बहुत सारे जंगली कुत्ते (Wild Dogs) छोड़ दिए ! सभी पुत्र भोजन छोड़ उन कुत्तो को भगाने में लग गए कोई उन कुत्तो को मार कर भगा रहा था तो कोई अपना भोजन छोड़ उनसे डरकर छुप (Hide) ...

motivate

 कामयाबी के पीछे मत भागो, काबिल बनो , कामयाबी तुम्हारे पीछे झक मार कर आएगी. जो काम दुनिया को नामुमकिन लगे, वही मौका होता है करतब दिखाने का. बड़े से बड़ा बिजनेस पैसे से नहीं, एक बड़े आइडिया से बड़ा होता है. मैं उठना चाहता हूं, दौड़ना चाहता हूं, गिरना भी चाहता हूं....बस रुकना नहीं चाहता . नजदीकी फायदा देखने से पहले दूर का नुकसान सोचना चाहिए. जब तक हार नहीं होती ना....तब तक आदमी जीता हुआ रहता है. वार करना है तो सामने वाले के गोल पर नहीं, सामने वाले के दिमाग पर करो..गोल खुद ब खुद हो जाएगा. कभी किसी को इतना भी मत डराओ कि डर ही खत्म हो जाए. जो हारता है, वही तो जीतने का मतलब जानता है. दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं विनर और लूजर...लेकिन जिंदगी हर लूजर को एक मौका जरूर देती है जिसमें वह विनर बन सकता है.. अगर किसी चिज को दिल चाहो तो पूरी कायनात उसे तूमसे मिलाने की कोशीश में लग जाती हैं। रास्ते की परवाह करुंगा तो मंजील बूरा मान जायेगी। 👍.