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सही राजा का चुनाव

प्राचीन समय (Ancient time) की बात है जहाँ एक नगर में एक राजा रहा करते थे, उनकी 10 रानियां (Queens) थी और उन सब रानियों के पच्चीस पुत्र थे ! समय के साथ साथ राजा भी बूढा हो चला था ! उस राजा ने सोचा कि अब बुढ़ापा मेरा साथ नहीं दे रहा है तो उसने अपने सभी पुत्रो में से किसी एक सुयोग्य पुत्र (Competent Son) को राजा बनाने का निश्चय (Decision) किया ! लेकिन राजा चाहता था कि राजा के पद के लिए सही पुत्र का चुनाव होना चाहिए ताकि आने वाले समय में प्रजा उन्नति (Development) कर सके !

राजा के मन में एक विचार (Discretion) आया और उसने अपने सभी पुत्रो के लिए एक विशाल भोज (Large Banquet) कराने की सोची ! अगले ही दिन राजा ने अपने सभी पुत्रो के लिए एक विशाल भोज का आयोजन (Arrangement) किया जिसमे अनेक प्रकार के स्वादिष्ट पकवान (Tasty Delicacy) आदि भी शामिल थे ! जब सभी पुत्रो ने भोजन शुरू किया तो राजा के कहे अनुसार सेवको (Servant/Devotee) ने बहुत सारे जंगली कुत्ते (Wild Dogs) छोड़ दिए ! सभी पुत्र भोजन छोड़ उन कुत्तो को भगाने में लग गए कोई उन कुत्तो को मार कर भगा रहा था तो कोई अपना भोजन छोड़ उनसे डरकर छुप (Hide) गया था!



अगले ही दिन राजा ने अपने राज्य के लिए सही उत्तराधिकारी के चयन के लिए पूरी प्रजा (People/Community) को निमंत्रण (Invitation) दिया ! प्रजा भी अपने नए राजा के दर्शन (Visitation) हेतु उत्तेजित (Excited) थी ! राजा विक्रम ने अपने सभी पुत्रो से पूछा कि:-“क्या कल आप सभी ने भर पेट भोजन कर लिया था”?
तभी राजा के एक पुत्र ने कहा कि नहीं…..मैं ठीक तरह से भोजन नहीं कर पाया क्योंकि भोजन करते समय बहुत सारे जंगली कुत्ते आ गए थे, जिसकी वजह से मैं उनको भागने में लग गया था और तभी राजा के दूसरे पुत्र ने कहा कि “मैं उन जंगली कुत्तों से डर (Scare) गया था और मैं अपनी जान बचाकर कहीं छुप गया था”!
तभी राजा के तीसरे पुत्र का जवाब था कि “जब राजकुमारों का भोजन हो रहा था, तब राजमहल (Palace) के सभी पहरेदार (Watchman) क्या कर रहे थे? वे जंगली कुत्ते भोजन करते समय अंदर कैसे आ गए? हमारे राजमहल के सभी पहरेदार नालायक (Incompetent) हैं वे सब एक भी कार्य ढंग से नहीं करते !

और ऐसे ही राजा के सभी पुत्रो ने कुछ ऐसा ही जवाब दिया लेकिन जब राजा ने अपने प्रिय पुत्र से पूछा कि क्या तुम्हारा भोजन ठीक तरह से हो पाया था?
राजा के पुत्र का जवाब था कि “हाँ पिताजी…..मैंने भोजन सही ढंग से कर लिया था और भोजन तो काफी स्वादिष्ट (Tasty) था ! यह सुनकर उस  के सभी भाइयों (Brothers) को बड़ा ही आश्चर्य (Surprised) हुआ कि इसने अपना भोजन कैसे पूरा कर लिया?
और राजा ने अपने प्रिय पुत्र अमित से पूछा कि “तुमने वो भोजन कैसे पूरा कर लिया”?
तभी पुत्र अमित ने कहा “पिताजी….. भोजन करते समय जब कोई कुत्ता मेरे पास आता तो मैं उसके सामने एक व्यंजन (Consonant) से भरी हुई थाली रख देता था जिससे वह अपना भोजन खाने में व्यस्त (Busy) हो जाता और मेरे भाइयो की सारी थालियां जो वो सब छोड़ के इधर उधर भाग रहे थे उन थालियो को कुत्ते आराम से खा रहे थे और इसी तरह कोई भी कुत्ता मुझे परेशान (Disturb) नहीं कर पाया और मैंने शांतिपूर्वक (Peacefully) अपना भोजन कर लिया !
विक्रम का जवाब सुन राजा एवं पूरी प्रजा की ख़ुशी का ठिकाना ना रहा और राजा ने अपने पुत्र विक्रम को राज्य का नया राजा घोषित (Declared) कर दिया क्योंकि वह मुसीबतो (Troubles) का सही ढंग से सामना करना जानता था!
MORAL :- इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है कि हमें किसी भी प्रकार की असुविधा (Disadvantage/Discomfort) पर भय नहीं करना चाहिए बल्कि उन असुविधाओं में भी, अपना और अपने लोगों का भला किस प्रकार हो सके, इसका उपाय (Plan) करना चाहिए”।. .

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